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पूर्व जन्म की रोमांचक स्मृतियां

सम्पादक – शारदा शुक्ला

आत्मा की अमरता अब सिद्ध है।इसके पुनर्जन्म होते रहते हैं।गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि ‘जन्म लेने वाले की मृत्यु और मरने वाले का जन्म ध्रुव है’।आगे वे कहते हैं,”हे अर्जुन!हमारे और तुम्हारे बहुत जन्म हुए हैं;वे मुझे तो सब ज्ञात हैं,कितु तुम्हें नहीं”। मृत्यु के समय आत्मा स्थूल शरीर त्याग सूक्ष्म शरीर सहित बाहर हो जाता है।

सूक्ष्म देह में दसो इन्द्रियाॅ,पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश,वायु के अपञ्चीकृत रूप,पञ्च प्राण,मन,बुद्धि,चित्त,अहंकार,अविद्या,काम और कर्म(कुल 27अवयव)होते है।इसमें स्मृति नहीं है;अतः जीव को यह याद नहीं रहता कि वह पहले क्या था?हालाॅकि इसके विरले अपवाद भी हैं और उन्हें पूर्व स्मृतियाॅ बनी रहती हैं।इन अपवादों का ठोस वैज्ञानिक आधार पता नहीं चल पाया है,किंतु इनके उदाहरण मिलते रहते हैं।
यूनानी गणितज्ञ और दार्शनिक पाइथागोरस के बारें कहा जाता है कि उन्हें अपने कई पूर्व जन्म याद थे।एक जन्म में वह ट्राय के योद्धा थे और युद्ध में ही मारे गये थे।एक अन्य जन्म में वह ‘हर्मोटिमस’थे और तब योग बल से अपना भौतिक शरीर छोड़कर मनचाहा विचरण कर लेते थे तथा फिर अपने स्थूल देह में आ जाते थे।एक बार ऐसा ही करने पर उनके विरोधियों ने उनका स्थूल शरीर जला दिया और वह वापस नहीं हो सके।एक अन्य जन्म में वह ‘लीडिया’में एक दुकानदार की पत्नी थे;तथा एक अन्य बार वैश्या भी रहे।ब्रिटिश उपन्यास लेखिका ‘जान ग्राण्ट’ने सात उपन्यास लिखे।उनका दावा था कि ये सब उनके सात पूर्व जन्मों की अपनी ही जीवन कथाएं है,जो उन्हें स्मरण बनी रहीं।उनका पहला उपन्यास “विंग्ड फरोवा’1937 में प्रकाशित हुवा,जब वे 30 वर्ष की थीं।उसमें 3000 साल पहले के मिस्र के इतिहास का सही वर्णन मिला,जबकि तब तक उन्होंने वह इतिहास पढ़ा ही नहीं था।उनका कहना था कि उस उपन्यास की नायिका’सेकीता’ वही हैं,जो उतने वर्ष पहले एक फरोआ की पुत्री थीं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई में कई दशक पूर्व पञ्छी देवी नामक बालिका कथा प्रवचन करती थी।उसे अपने तीन जन्म का हाल याद था।बड़े बड़े लोग देखने,बात करने आते रहे और अपने कौतूहल का समाधान करते रहे।बलरामपुर के महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद की मृत्यु जून-1964 में हो गई।उनका जन्म 28 जुलाई-1968 को कुछ दूर कस्बा शिवपुरा में पन्नालाल स्वर्णकार के पुत्र के रूप में हुआ।बालक ने सुध सम्हालने पर स्मृतियाॅ बताईं।घटना प्रकाशित हुई थी।उदाहरण और भी हैं।छुट भैयों की बात नज़रन्दाज कर दी जाती है।बड़ों की इतिहास बन जाती है।शेक्सपियर कहते है,”भिखमंगों की मृत्यु पर आकाश में धूमकेतु नहीं दिखते,वे तो किसी राजे महाराजे के मरने पर ही व्योम को आलोकित करते हैं’।
ऐसी रहस्यमयी रोमाञ्चक घटनावों के पीछे क्या विज्ञान है?इसपर अनुसंधान और ऑकड़ों के विश्लेषण जारी हैं।अब प्रकृति की इन अनसुलझी गुत्थियों को मानव मेधा कब तक खोल पायेगी और कितनी;यह कहा नहीं जा सकता।

रघोत्तम शुक्ल

स्तंभकार

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